अक्सर गैरमुस्लिम भाई हमसे पूछते हैं कि इस्लाम में ये "अल-तकिया" क्या चीज़ है ?? क्या ये गैरमुस्लिमों को बहकाने के लिए मुसलमानों को झूठ बोलने का धार्मिक आदेश नही है ??
.
...... देखिए मेरे भाइयों, .... जैसा आपको समझाया गया है, बात वो नही है... असल में वास्तविकता सिर्फ़ इतनी है कि जब किसी मुसलमान को उसके धर्म के कारण जान का खतरा दिखाया जाए और अपने ईमान के बारे में झूठ बोलने से उसकी जान बच सकती हो तो उस मुसलमान को अपने ईमान के बारे में अपनी जान बचाने के लिए झूठ बोलने पर कोई गुनाह नही है, यही अल-तकिया है,
ये मामला उस दौर से जुड़ा हुआ है जब मक्का के गैरमुस्लिम मुसलमानों पर बुरी तरह ज़ुल्म तोड़ते थे और उन्हें कहते थे कि या तो इस्लाम छोड़ दो या हम तुम्हें कत्ल कर देंगे.... इस मुद्दे पर क़ुरआन पाक में एक आयत
नाज़िल हुई है और अल तकिया के नियम उसी आयत के आधार पर इस्लामी कानूनविदों ने तय किये हैं... वो आयत ये है...
.
..."जिस किसी ने अपने ईमान के पश्चात अल्लाह के साथ कुफ़्र किया -सिवाय उसके जो इसके लिए विवश कर दिया गया हो और दिल उसका ईमान पर सन्तुष्ट हो - बल्कि वह जिसने सीना कुफ़्र के लिए खोल दिया हो, तो ऐसे लोगो पर अल्लाह का प्रकोप है और उनके लिए बड़ी यातना है" (सूरह नहल, 16:106)
.
इस आयत में ये ज़िक्र है कि ईमान के विषय में वास्तविकता से विपरीत बात कहना सिर्फ तब के लिए है जब उस मुसलमान को ऐसा करने के लिए बुरी तरह विवश कर दिया गया हो...
... इस आयत पर कमेंट्री करने वाले तमाम इस्लामी दुनिया के विद्वान ये कहते हैं कि ये आयत केवल तब के लिए है जब गैरमुस्लिम मुसलमान को मुसलमान होने की वजह से क़त्ल कर देने पर उतारू हों, इसके अलावा किसी सिचुएशन के लिए नही
....सूरह नहल की इस आयत के विषय मे शिया विद्वान् और सुन्नी विद्वान, दोनों ही मानते हैं कि ये आयत हज़रत अम्मार बिन यासिर रज़ि० के सम्बंध में नाज़िल हुई थी...
हज़रत अम्मार मक्का में रहने वाले एक ग़रीब व्यक्ति थे जो नबी सल्ल० की शिक्षाओं से प्रभावित हो कर उस दौर में अपने माता पिता समेत मुस्लिम बन गए थे जब मक्का के मूर्तिपूजक समुदाय के लोग मुस्लिमों को इस्लाम छुड़ा देने के उद्देश्य से भयंकर शारीरिक प्रताड़नाएं दिया करते थे, यही दुष्ट व्यवहार मक्का के मूर्तिपूजकों ने हज़रत अम्मार रज़ि० और उनके बूढ़े माता पिता, हज़रत यासिर रज़ि० और बीवी सुमैय्या रज़ि० के साथ किया, यहां तक कि हज़रत यासिर और बीवी सुमैय्या रज़ि० की निर्मम हत्याएं तक कर डालीं ...
.तो जब मक्का के मूर्तिपूजकों की दी हुई प्रताड़नाओं को बर्दाश्त न कर पाने और जिस तरह हज़रत अम्मार के वालिदैन को मूर्तिपूजकों ने प्रताड़ित कर करके मार डाला, इसी तरह वो हज़रत अम्मार की भी हत्या न कर डालें, इस भय से विवश हो कर हज़रत अम्मार ने झूठ बोल दिया था कि मैंने इस्लाम को छोड़ दिया,
पर अंदर से वो इस्लाम पर ही कायम थे और केवल अपनी जान बचाने के लिए ये झूठ बोला था, पर ये झूठ बोल कर वो बुरी तरह अपराधबोध में ग्रस्त हो गए थे, तब सूरह नहल की ये आयत इस उद्देश्य से उतारी गई कि अम्मार दुःखी न हों उनपर कोई गुनाह नही है, वो विवश थे
.
..... सुन्नी इस्लाम में केवल गैरमुस्लिमों से जान का भय होने की एकमात्र सिचुएशन पर अपने ईमान के विषय में झूठ बात बोलकर अपनी जान बचा लेने की अनुमति भर ही अल तकिया है, किसी गैरमुस्लिम को बहकाने के लिए लेशमात्र भी नहीं
... शिया इस्लाम मे सम्भवतः इस नियम को थोड़ा और विस्तार दिया गया है, पर जहां तक मेरी जानकारी है शिया इस्लाम में भी किसी गैरमुस्लिम को धोखा देने के लिए नही बल्कि चूंकि शिया समुदाय मुसलमानों के भीतर ही एक अल्पसंख्यक समुदाय रहा, और सुन्नी बहुल इलाकों में रहने वाले शिया मुसलमान शिया सुन्नी विभेद के किसी विवाद में न पड़ें इसलिए सुन्नी बहुल इलाकों में रहते हुए अपनी शिया आस्थाओं का प्रदर्शन न करने और सुन्नी आस्थाओं के मुताबिक सार्वजनिक धार्मिक क्रियाकलापों को कर लेने की वैधानिक अनुमति भर का ही विस्तार शिया समुदाय में भी है, यानी वहां भी किसी गैरमुस्लिम को धोखा देने की गुंजाइश वहां भी नहीं ही है ...!!!
.
.... लेकिन हमारे देश के कुछ गैरमुस्लिम "धर्मरक्षक" संगठन अकारण ही ये साबित करना चाहते हैं मुसलमान को इस्लाम को फैलाने के लिए, या दुश्मनों को छलने के लिये किसी भी तरह का झूठ बोलने की शिक्षा दी गई है, ऐसे झूठे प्रचारों का कोई सबूत नहीं है, जब मेरे साफदिल मित्र कोई ऐसा झूठा प्रचार मुस्लिमों के विरुद्ध सुनें तो आंख बंद करके विश्वास करने की बजाय अगर वो एक बार नेट पर अल तकिया के बारे में किसी इस्लामी साइट पर सर्च कर लेंगे तो ही दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा...
.... अपने शत्रुओं को धोखा देने के लिए झूठ बोलने का क़ानून भले ही दूसरों के यहां हो सकता हो, पर मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि इस्लाम में धोखाधड़ी करने का ऐसा कोई कानून और इजाज़त नहीं है...!!!
No comments:
Post a Comment