एक दिन संयोग से मैंने डॉ. वेदप्रकाश उपाध्याय की किताब "नराशंस और अन्तिम ऋषि" में महात्मा बुद्ध द्वारा अपने शिष्य नन्दा को अपने अंतिम समय में बताई गई भविष्यवाणियां पढ़ीं, जिनमें महात्मा बुद्ध ने कहा था कि "मैं न पहला बुद्ध हूँ, न ही अंतिम, .... मेरे बाद एक पवित्र अन्तःकरण वाला बुद्ध मैत्रेय आएगा" गौतम बुद्ध ने अगले बुद्ध की जो निशानियां बताई थीं, जैसे कि वो धन-ऐश्वर्य वाला होगा, पत्नी बच्चों वाला होगा किन्तु सादा जीवन जियेगा, वो धर्म प्रचारक होगा, उसका एक राज्य होगा, और सबसे मुख्य निशानी कि वो पीछे गर्दन मोड़कर देखने की बजाय पूरा पीछे घूमकर देखता होगा... ये तमाम निशानियां हज़रत मोहम्मद सल्ल० पर फिट बैठ रही थीं.... ये पढ़कर ऐसा लगा कि महात्मा बुद्ध जिस बुद्ध परम्परा की बात कर रहे थे, अगर उस परम्परा में हज़रत मुहम्मद सल्ल० शामिल हैं तो वो नबी परम्परा ही है....
.... लेकिन मैं जानता था कि जो भी हो, नबी सल्ल० के पूर्ववर्ती नबी बुद्ध नही बल्कि ईसा थे, और ये महात्मा बुद्ध ने नही बल्कि हज़रत ईसा ने कहा था कि मेरे बाद जो नबी आएगा उसका नाम अहमद होगा, यानी हज़रत मोहम्मद सल्ल० के आगमन की भविष्यवाणी जिस नबी ने की थी, वो ईसा थे बुद्ध नही.....
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.... ख़ैर मेरे ये विचार समय के साथ आये गए हो गए... तभी एक दिन नेट पे किसी साइट पर मैंने ये पढ़ा कि एक रूसी गुप्तचर एवं पत्रकार निक़ोलस नोटोविच को उन्नीसवीं शताब्दी में लद्दाख के ‘हेमिस’ नामक तिब्बती बौद्ध-मठ से ईसा का एक प्राचीन हस्तलिखित जीवनचरित प्राप्त हुआ था, इसी के बाद ये विचार फैलने लगा कि ईसा अपने अज्ञातवास में भारत आये थे और बौद्धों के सम्पर्क में रहे थे... उस वेबसाइट पर ये सिद्ध करने का प्रयास किया गया था कि ईसा मसीह बौद्ध धर्म से प्रेरित थे, लेकिन मेरा ध्यान वहां किसी और बात पर गया ... कि ईसा का जीवन चरित बौद्ध मठ में क्यों ? कहीं बुद्ध परम्परा वास्तव में नबी परम्परा ही तो नही थी...??
इस दिशा में मैंने और पढ़ा तो ईसा और बुद्ध के जीवन वृतांतों में ज़बरदस्त समानता पाई
... जैसे ईसा के जन्म से पूर्व जिब्रील आकर मरियम को बताते हैं कि मुझे ईश्वर ने भेजा है ताकि तुम्हें एक पुत्र होने का शुभ समाचार दूँ जो ईश्वर का दूत होगा
बुद्ध के जन्म से पूर्व उनकी माँ महामाया के स्वप्न में सुमेध नाम का बुद्ध आकर कहता है कि मैं तुम्हारे गर्भ से जन्म लेने वाला हूँ
.... प्रसव पीड़ा होने पर मरियम खजूर के पेड़ के नीचे जा पहुँची थीं, जहाँ उन्हें रब ने खजूर का तना हिलाने की सलाह दी थी, क़ुरआन में ये ज़िक्र है
उधर बुद्ध के जन्म की कथा में ये ज़िक्र है कि प्रसव पीड़ा होने पर महामाया ने शाल वृक्ष की डाल पकड़ी थी यानी ये दो घटनाएं एक समान हैं.... माता के नाम भी मिलते जुलते (मरियम-महामाया) हैं
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फिर ईसा की कथा में ज़िक्र है कि वो बालपन से ही शांत और करुणामय स्वभाव के थे और धर्मगुरुओं के साथ शास्त्रार्थ करने लगे थे
महात्मा बुद्ध के बारे में भी उनके बचपन से ही शांत स्वभाव, करुणामय और विचारशील होने की कथाएं प्रचलित हैं ....!!
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.... ईसा के बारे में कहा जाता है कि जब शैतान ने उन्हें बरगलाने का प्रयास किया तब ईसा ने 40 दिन तक उपवास करके सिद्धावस्था पाई और बुद्ध पर जब "मार" का आक्रमण हुआ तब बुद्ध ने 49 दिन तक उपवास करके सिद्धि प्राप्त की !!
ईसा ने एक धार्मिक वर्ग फरीसियों का प्रबल विरोध किया जो फरीसी खुद को ईश्वर के प्रिय कहा करते थे, वहीं बुद्ध ने ब्राह्मणों का प्रबल विरोध किया था... इसके अतिरिक्त ग्रहस्थ जीवन का त्याग, प्राणियों पर दया वेश्याओं का जीवन सुधारना, चोर डाकुओं का जीवन सुधारना, ध्यान मग्न रहना ये तमाम बातें दोनों की जीवनी में एक समान हैं, दोनों की अहिंसा की शिक्षा भी काफ़ी एक जैसी ही है....!!!
.... ईसा और बुद्ध, दोनों के जीवन में ये तमाम समानताएं, बौद्ध मठ में ईसा की जीवनी होना, ये तो सिद्ध कर देते हैं कि ईसा मसीह को भी एक मैत्रेय माना गया था... लेकिन बुद्ध धर्म की बहुत सी पांडुलिपियों को जला डाले जाने की वजह से इस बाबत अधिक जानकारी नही फैल सकी कि ईसा और गौतम बुद्ध एक ही परम्परा का अंग थे... उल्टे देखकर लगता है कि बौद्ध अनुयायियों के यहां भी दो बुद्ध यानी ईसा और गौतम के जीवन चरितों को आपस में गड्डमड्ड कर दिया गया, और गौतम के काफी बाद हुए मैत्रेय बुद्ध ईसा के जन्म और सिद्धि प्राप्ति व शिक्षाओं को गौतम बुद्ध की कथा में जोड़ दिया गया....यदि ईसा को बुद्ध के रूप में बौद्धों ने स्वीकारा होगा तभी उनके जीवन चरित शिक्षाओं और भविष्यवाणियों को भी संकलित किया होगा, जिनमें अगले बुद्ध के बारे में भविष्यवाणी भी थी..
इन समानताओं और भविष्यवाणियों को देखने के बाद ये ही विचार और प्रबल हो जाता है कि हो न हो गौतम बुद्ध नबी परम्परा से ही सम्बन्धित हैं... और सम्भवतः गौतम बुद्ध वो ही नबी हैं, जिन्हें "ज़ुल किफ़ल" यानी कपिल (कपिलवस्तु) वाला कहा गया है ....!!!
~ zia
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