Monday, 10 August 2020

गर्भ में क्या है। अधिक बच्चे पैदा करना।

क्या सिर्फ अल्लाह जानता है कि गर्भ में क्या है।


कुछ भाई पवित्र कुरान का उपहास करते हुए कहते हैं कि कुरान 31:34 मे लिखा हुआ है कि केवल अल्लाह ही ये बात जानता है कि किसी स्त्री के गर्भ मे बेटा या बेटी क्या है, और अल्लाह के अतिरिक्त इस बात को कोई नहीं जान सकता कि स्त्री के गर्भ मे क्या है,
शायद अल्लाह नहीं जानता था कि मनुष्य आगे चलकर ऐसी मशीनों का आविष्कार कर लेगा जिससे न सिर्फ वो स्त्री के गर्भ की कमी बेशी का पता लगा लेगा, बल्कि ये भी बड़ी आसानी से पता लगा लेगा की उस स्त्री के पेट मे लड़की है या लड़का... आज सोनोग्राफी के माध्यम से ये सब कुछ सम्भव है ... 
यानी जिस कुरान को मुस्लिम विज्ञान सम्मत बताते नहीं थकते, उसी कुरान को विज्ञान ने गलत साबित कर दिया ।...//

उत्तर देने से पहले मैं एक बात बता दूं कि हम आध्यात्मिक दृष्टिकोण रखने वाले मुस्लिम ये जानते हैं कि पवित्र आयत में गर्भस्थ शिशु के जेंडर और स्वास्थ्य की जानकारी से बहुत अधिक जानकारी की बात अल्लाह ने की है, यानि जन्म लेने वाले की पूरी जिंदगी में आने वाले हालात की जानकारी, जन्म लेने वाला अपने जीवन में अच्छे स्वभाव का होगा या बुरे स्वभाव का इसकी जानकारी, उसकी कुल जीवन अवधि समेत ऐसी अनेक बातों की जानकारी जिन्हें मनुष्य लाख सर पटक कर भी नही पा सकते
... लेकिन जिन लोगों का इस्लाम या क़ुरआन के आध्यात्मिक पहलुओं पर विश्वास नही तो वो केवल आयत में लिखे हुए शब्दों के आधार पर प्रश्न करते हैं, और ऐसे लोग हमारे आध्यात्मिक दृष्टिकोण से संतुष्ट नही होते...

ऐसे लोगों को हम संतुष्ट कर भी नही सकते, जब तक अल्लाह उन्हें संतुष्ट न करना चाहे...... लेकिन ऐसे प्रश्न जब आते हैं, तो इनका जवाब देते हुए खुद हमारा विश्वास अल्लाह की महानता पर बढ़ता जाता है... क्योंकि हम पाते हैं कि अल्लाह ने ऐसे मौकों पर भी किसी भी तरह अपनी आयतों पर सवाल उठाये जाने की थोड़ी भी आशंका बाकी नही रखी है
.
मैं आपको जिस आयत पर प्रश्न किया गया है उस आयत का अनुवाद दिखाना चाहता हूँ , आयत ये है 
"निसन्देह अल्लाह के पास कयामत की घड़ी का ज्ञान है, और वह बारिश बरसाता है , और जानता है जो कुछ गर्भाशयों मे होता है, कोई नहीं जानता कि वो अगले दिन क्या कमाएगा और कोई व्यक्ति नहीं जानता कि किस भूभाग मे उसकी मृत्यु होगी । निसन्देह अल्लाह जानने वाला और खबर रखने वाला है ॥"
[ लुकमान 31:34 ]

यहाँ देखिए आयत का वर्ड बाए वर्ड इंगलिश ट्रांसलेशन
http://corpus.quran.com/wordbyword.jsp?chapter=31&verse=34 )

आयत को गौर से पढ़िए तो आप पाएंगे कि वहाँ ये जरूर लिखा है कि गर्भाशय मे क्या है इसका ज्ञान अल्लाह के पास है, पर वहाँ इस बात का दावा नहीं किया गया कि अल्लाह के अतिरिक्त इस बात का कुछ आंशिक ज्ञान भी कि गर्भ मे क्या है अन्य किसी को नहीं है, या नही हो सकता,
जिस बात के लिए ये दावा किया गया है कि उस बात का ज्ञान अल्लाह के अलावा किसी और को नहीं हो सकता वो बात गर्भ के भीतर का ज्ञान नहीं बल्कि कोई और ही बात है ॥

देखिए आयत मे केवल एक बात ( गर्भाशय का ज्ञान ) ही नहीं, बल्कि एक से अधिक विषयों की बात लिखी गई है [ 1- कयामत की घड़ी का ज्ञान, 2- वर्षा करने की अधिकार शक्ति, 3- गर्भाशय का ज्ञान, 4- व्यक्ति के अगले दिन की कमाई का ज्ञान, 5- और व्यक्ति के मृत्यु-स्थल का ज्ञान ]
इनमें से हर एक बात के साथ ये नहीं लिखा कि उसे अल्लाह के अतिरिक्त कोई नहीं जान सकता...
आयत के शुरुआती भाग को दोबारा पढ़िए
".... निसन्देह अल्लाह के पास कयामत की घड़ी का ज्ञान है, और वह बारिश बरसाता है , और जानता है जो कुछ गर्भाशयों मे होता है......"
देखिए यहां कहीं नहीं लिखा कि अल्लाह के अतिरिक्त कोई नहीं जानता कि गर्भ मे क्या है

इसके बाद जाकर आयत मे उन बातों का जिक्र किया गया है जिनका ज्ञान केवल अल्लाह के पास है और उन्हें अल्लाह के अलावा कोई और नहीं जान सकता

".... कोई नहीं जानता कि वो अगले दिन क्या कमाएगा और कोई व्यक्ति नहीं जानता कि किस भूभाग मे उसकी मृत्यु होगी । निसन्देह अल्लाह जानने वाला और खबर रखने वाला है......"

देखिए स्पष्ट पता चल रहा है कि आयत मे केवल दो ही बातों के लिए यानि 1- व्यक्ति के अगले दिन की कमाई के ज्ञान, 2- और व्यक्ति के मृत्यु-स्थल के ज्ञान के लिए ही ये दावा किया गया है कि उन्हें अल्लाह के अतिरिक्त और कोई नही जानता, जो कि सदैव अटल सत्य रहेगा, इन दोनों बातों के सिवाय अन्य किसी बात के लिए आयत मे तो ऐसा दावा नहीं किया गया है, इस आयत में अल्लाह द्वारा वर्षा कराने का भी ज़िक्र है, अगर इसके साथ ये भी दावा होता कि अल्लाह के सिवा कोई और वर्षा नही करा सकता तो विरोधियों को एक और मौका मिल जाता क़ुरान को गलत कहने का, क्योंकि आज इंसान विज्ञान की मदद से कृत्रिम वर्षा कराने में सक्षम है, लेकिन वर्षा के मामले में भी अल्लाह ने "कोई दूसरा नही करा सकता" वाला दावा नही किया ॥

तो इस आयत को देखकर हमारे वो गैरमुस्लिम भाई जो क़ुरआन को मनुष्य की रचना समझते हैं उनको इस बात का आश्चर्य होना चाहिये कि 1400 वर्ष पहले क़ुरआन के रचयिता को कैसे इस बात का ज्ञान था कि आनेवाले समय मे मनुष्य कृत्रिम वर्षा कराने और सोनोग्राफी की तकनीकी विकसित कर लेगा,  जो उसने इस विषय में कोई ऐसा दावा नही किया जो भविष्य में गलत सिद्ध हो जाता ??
.... आप आश्चर्य कीजिये, हमारा तो विश्वास इस प्रश्न के बाद अपने रब्ब पर और बढ़ ही गया है, बेशक़ अगर इंसान कुरआन को लिखता तो ऐसी ही गलतियां करता जो आने वाले समय में विज्ञान के अविष्कारों द्वारा झूट ठहरा दी जातीं... लेकिन पवित्र कुरआन का रचयिता तो खुद इस पूरे जहान का मालिक अल्लाह ही है, तो वो ऐसी गलतियां कैसे करता ? अल्लाह ने ही तो भविष्य में कृत्रिम वर्षा और सोनोग्राफी आदि की तकनीकी मनुष्य को देना नियत किया था,  इसीलिए कुरान के रचयिता अल्लाह ने आयतों को रचते समय उसमे ऐसी कोई बात नही लिखी जो आगे चल कर गलत सिद्ध हो जाती और क़ुरान पाक से लोगों की बदगुमानी का सबब बनती... निसन्देह अल्लाह तो भूत भविष्य और वर्तमान, मनुष्य और विज्ञान सभी का निर्माता है, वो अपनी रचना के बारे मे सटीक जानकारी नहीं रखेगा तो फिर कौन रखेगा ??

.... साथ ही यहाँ इस आयत का सूक्ष्म निरीक्षण कर के ये साफ हुआ कि सोनोग्राफी से इनसान ने जो थोड़ा बहुत गर्भ के बारे मे जाना भी है, या कृत्रिम वर्षा की तकनीक जानी भी है, तो वो भी कुरान पाक के खिलाफ जाकर नही... अल्लाह की इच्छा बिना नहीं जाना सीखा, बल्कि अल्लाह ने सिखाया, जानकारी दी तब इंसान ने जाना...

बेशक़ अल्लाह ही हर शय पर क़ादिर है !!!

~ ज़िया इम्तियाज़।

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अधिक बच्चे पैदा करना।

बहुत समय से मैं कुछ लोगों को भारतीय मुसलमानों के खिलाफ ये झूठे आरोप लगाए जाते देख रहा हूँ कि देश के हिन्दुओं के मुकाबले मुसलमान बहुत ज्यादा बच्चे पैदा करते हैं, मुसलमान अपनी स्त्रियों को बच्चे पैदा करने की मशीन मानते हैं, और एक एक मुसलमान 12-12 बच्चे पैदा करता है ॥

ये भी मुस्लिमों के दुश्मनों की खीज ही है जो वो मुसलमानों के बच्चों पर उतार रहे हैं, पर वास्तव मे हमारे देश मे केवल इस्लाम ही ऐसा बड़ा धर्म है, जिसकी शरीयत मे गर्भ निरोध करने की अनुमति कुछ वैध कारणों से है , यानि यदि मां और बच्चे की सेहत सही रखने के ऐतबार से दो बच्चों मे अंतर रखने, और यदि कोई स्त्री पहले मां बन चुकी है और भविष्य मे गर्भधारण करने से उसकी जान को खतरा हो तो उसके लिए मुसलमान गर्भ निरोध कर सकते हैं
इस्लामी शरीयत मे गर्भ निरोध का "अज़्ल" नामक तरीका सुझाया गया है, 

इसका अर्थ ये है कि मुस्लिम समाज स्त्रियों को बच्चा पैदा करने की मशीन नहीं मानता, बल्कि उन्हे और उनके स्वास्थ्य की सुरक्षा को उनके बच्चे पैदा करने से ज्यादा महत्वपूर्ण मानता है..!!

कम से कम अपने आस पास मैंने तो अन्य ऐसा कोई धर्म नही देखा जिसने गर्भ निरोध की अनुशंसा की हो, बल्कि अन्य धर्मों का जोर तो अधिक से अधिक बच्चे पैदा करने पर ही रहा
क्षमा प्रार्थना के साथ मैं बताना चाहता हूँ, की स्त्री को बच्चे पैदा करने की मशीन नियोग प्रथा बनाने वालों ने समझ रखा था
रिगवेद मे नियोग का विधान बताया गया है जिसके अनुसार निस्संतान स्त्री पुरुष, संतान प्राप्ति के लिए अन्य स्त्री पुरूषों से बिना विवाह के शारीरिक सम्बन्ध स्थापित कर सकते थे 

मुस्लिमों पर अधिक बच्चे पैदा करने का आरोप मिथ्या मात्र है, वरना खुद सोचिए की आजादी के 67 साल बाद भी "कम बच्चे पैदा करने वाले हिन्दुओं" का भारत की जनसंख्या मे अनुपात "अधिक बच्चे पैदा करने वाले मुस्लिमों" के मुकाबले थोड़ा सा भी क्यों नही कम हुआ 
ये जनसंख्या अनुपात थोड़े बहुत मामूली फर्क के साथ उतना ही क्यों बना रह गया जितना आजादी के समय था ( लगभग 80% हिन्दू, लगभग 13% मुस्लिम और शेष अन्य ) बावजूद इसके कि मुस्लिमों ने तो इन 67 वर्षों मे निर्बाध अपने बच्चे पैदा किए, लेकिन हिन्दुओं ने इस बीच अपने करोड़ों अजन्मे बच्चों को मरवा डाला, क्योंकि दुर्भाग्य से वो बच्चे लड़कियां थीं ॥

ये भी ध्यान रखिए कि मुस्लिमों की जनसंख्या मे धर्म परिवर्तन कर के मुस्लिम बने लोगों का प्रतिशत धर्म परिवर्तन कर के हिन्दू बने लोगों के मुकाबले काफी अधिक है..... यानी मुस्लिमों की जनसंख्या बढ़ने का कारक केवल बच्चे पैदा करना नही बल्कि धर्म परिवर्तन भी है ..... अब बताईए कौन ज्यादा बच्चे पैदा करता है .....???

पर हमें अपने हिंदू भाईयों के अधिक बच्चे पैदा करने से कोई आपत्ति नही, बल्कि हम तो ये चाहते हैं कि वे अपनी जिन बेटियों को मां के पेट मे ही मार देते हैं उन सबको भी पैदा करें और जीने दें... साथ ही मैं ये भी नही मानता कि हिन्दू भाईयों के मुकाबले मुस्लिम अधिक बच्चे पैदा करते हैं, और उन्हें कम बच्चे पैदा करने चाहिए,

मुस्लिम भी जितने चाहें अपनी सुविधा के अनुसार बच्चे पैदा करें... मुझे नहीं लगता कि हिन्दू भाईयों को भी इस बात से कोई आपत्ति होगी,

वास्तव मे मुस्लिमों के बच्चों से आपत्ति केवल वो अलगाववादी जताते हैं, जो हिन्दुओं को मुस्लिमों का झूठा भय दिखाकर हिन्दुओं को ज्यादा बच्चे पैदा करने के लिए उकसाते हैं... तो फिर ऐसे दोगले लोगों की फालतू बातों पर क्या ध्यान देना ....!!!

~ ज़िया इम्तियाज़।




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