Tuesday, 11 August 2020

हलाल हराम।

हलाल हराम।

कुछ अतिउत्साही इस्लाम विरोधी भाईयों ने आरोप लगाए कि इस्लाम मे सूर्य का दर्शन करना,मंगल ,बुध सहित सारे ग्रहों का नाम लेना,सारे नक्षत्रो का नाम लेना तथा astronomy खगोलशात्र की पढाई भी हराम है.,अरब के कबीलों में १४०० साल पहले जो खाने पीने की चीजे पाई जाती थीं, उसको छोड़कर बाकि सभी खाने की चीजे हराम है, कुरान में जो दवाई लिखी है.उसको छोड़कर आधुनिक
दवाईया, अस्पताल, आयुर्वेदिक दवाई हराम है..... जब सारी अच्छी चीजे मुसलमानों के लिए हराम ही है, तो अल्लाह ने किसके लिए यह सब बनाया था
सारी अच्छी चीजे तो गैर मुस्लिमो और काफिरों के लिए है, ये तो पूरा का पूरा मुसलमानों के साथ धोखा हुआ है... आखिर इतनी सारी हराम की चीज अल्लाह ने क्यों बनाया -

इससे साबित होता है कि मुहम्मद (सल्ल.) ने अरब के कबीलों का रहन सहन कुरान में लिख दिया है...

उत्तर : इन भाईयों ने तर्को पर बात ही नहीं की, बल्कि हवा मे तीर छोड़े हैं .... अस्ल मे सूर्य और नक्षत्रो के देखना और इनके बारे मे पढ़ना हराम नहीं, बल्कि इन चीजों को देवी देवता मान लेना, या ग्रह नक्षत्रो को अपना भला बुरा कर सकने की शक्ति रखने वाला मानने का अंधविश्वास पालना मना है ... अब इन बातों मे क्या अच्छाई थी जिसपर इस्लाम ने प्रतिबंध लगा दिया, ये प्रश्न करने वाले ही जानें 
प्रश्न पूछने वाले भाईयों का कहना है कि इस्लाम मे सारी अच्छी अच्छी चीजें हराम हैं .... इस्लाम मे तो सूअर खाना हराम है, कुत्ता, बिल्ली, गिद्ध, कौवे और चील जैसे परजीवी हराम हैं और हलाल पशु पक्षियों का रक्त पीना भी हराम है, अब इन आपत्ति करने वाले भाइयों को अगर सूअर, कुत्ते और अन्य गन्दगिएं  "अच्छी चीज" लगती हैं तो शौक से खा लें किसने इन्हें रोका है,

इस्लाम मे शराब पीना हराम है, अगर इन लोगों को शराब इतनी ही पसंद है तो पानी की जगह शराब ही पिया करें और ये अच्छी चीज अपने बच्चों और मांताओं बहनों को भी पिलाया करें, हम इन्हें नहीं रोकेंगे... 

इस्लाम मे वेश्यावृत्ति और व्यभिचार भी हराम है, अगर ये भी अच्छी चीज है तो ये लोग इस अच्छी चीज का आनंद अपने परिवार को उठाने दें ... हमें तो अच्छा नहीं लगेगा पर ये लोग जानबूझकर कुएँ मे कूदना चाहें तो हम क्या कर सकते हैं

प्रश्न करने वालों ने कहा है कि 'साबित होता है की हज़रत मुहम्मद सलल्लाहो अलैहि वसल्लम ने अरब के कबीलों का रहन सहन कुरान में लिख दिया है'.... लेकिन गौरतलब है कि सुअर या अन्य गन्दे जानवरों का रक्त या मांस खाने पर नबी स. से पूर्व अरब मे कोई पाबन्दी नहीं थी, शराब वे लोग जमकर पिया करते, व्यभिचार और वेश्यावृत्ति का भी वहाँ खूब चलन था जिन बुराइयों पर नबी स. ने रोक लगाई, फिर ये आरोप कहाँ तक सही ठहरता है कि इस्लाम के नियम अरबी रीति रिवाजो पर आधारित हैं  ??

इसके अलावा इन लोगों का ये कहना कि इस्लाम मे नयी दवाइयां, नया इलाज और नबी सल्ल. के बाद के जमाने की हर चीज हराम है, तो इन आरोपों मे कोई सच्चाई नहीं बल्कि इन आरोप लगाने वालों की बौखलाहट का नतीजा है, ये लोग अपना आरोप सिद्ध करने के लिए किसी इस्लामी किताब से सबूत नही दे सकते
दुनिया जानती है कि मुस्लिम कभी नए इलाज और दवाओ या अन्य नई तकनीकी से परहेज़ नहीं करते ... जबकि हमारे देश मे हैण्डपम्प तक के विरोध का इतिहास रहा है ॥

~ ज़िया इम्तियाज़।

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