Sunday, 16 August 2020

जन्नत जहन्नुम का दीदार। भविष्य भूत की तरह दिखाना।

मेराज पर जन्नत जहन्नुम का दीदार।

एक सवाल आया है .... कि जबकि इस्लाम के हिसाब से जन्नत या दोज़ख इन्सान को कयामत के बाद मिलेगी तो फिर मेराज की रात मे आप सल्ल. की तमाम नबियों से मुलाकात कैसे हुई, और इस रात मे नबी सल्ल. ने दोज़ख मे औरतों को कैसे देख लिया ...??

दोस्तों,  जैसा कि मैं पहले बता चुका हूँ,  कि मेराज के वाकये के दो भाग हैं, 1. इसरा,  यानि जमीनी सफर,  और 2. मेराज यानि आसमानी सफर

मैं आपको ये भी बता चुका हूँ कि इसरा वल मेराज के सफर के बारे मे मुसलमानों मे दो किस्म के खयाल हैं, बड़ा तबका ये मानता है कि नबी सल्ल. मेराज पर जिस्म के साथ गए थे , जैसा कि अल्लाह के हुक्म से होना बिल्कुल मुश्किल नहीं है , वहीं कुछ मुस्लिमों का ये ख्याल भी है कि इस सफर पर नबी सल्ल. का जिस्म नही केवल आप सल्ल. की रूह गई थी, इनके इस ख्याल का आधार उम्मुल मोमिनीन हज़रत आइशा सिद्दीका रज़ि. का ये कौल है कि " मेराज का वाकया हुज़ूर सल्ल. की रूह के साथ ही पेश आया था और आप सल्ल. के जिस्म ने अपनी जगह नहीं छोड़ी थी " अम्मा आइशा रज़ि. के इस क़ौल को अल-ताबरी और इब्न कसीर जैसे विद्वानों ने अपनी तफ्सीरात मे नक्ल किया है..

साथ ही मै ये भी कह चुका हूँ कि मेरा अकीदा ये है कि इस सफर का जमीनी हिस्से वाला वाकया आप सल्ल. के जिस्म के साथ पेश आया था.

यहीं मैं कहना चाहता हूँ दो हिस्सों मे हुआ ये सफर  जिस्मानी और रूहानी दोनों ही तौर पर हुआ, यानि "इसरा" तो आप सल्ल. के जिस्म के साथ हुआ पर "मेराज" आप सल्ल. की रूह के साथ हुआ था .... क्योंकि कुरान शरीफ मे इसरा का जिक्र करते हुए अल्लाह साफतौर पर फरमाता है कि वो एक ही रात मे अपने बन्दे को खान-ए-काबा से मस्जिद ए अक्सा तक ले गया , यानि कुरान मे अल्लाह ने इसरा का ज़िक्र एक अस्ल जिस्मानी सफर के तौर पर किया .... फिर इसरा को ही अल्लाह ने कुरान और हदीस मे लोगों के सामने साबित भी किया है... और हमारा अकीदा है कि कुरान मे कोई बात, इस तरह से नही लिखी गई है जैसी हकीकत मे हुई ही न हो, इसलिये हमे पूरा विश्वास है कि इसरा के सफर पर आप सल्ल. जिस्मानी तौर पर गए थे ....

जहाँ तक इस सफर के दूसरे भाग यानि मेराज (ऊंचाई पर जाने) का ताल्लुक है, तो उसके बारे मे अल्लाह पाक ने कुरआन पाक सूरह बनी इसराईल की 60 वीं आयत मे खुद इसे एक "रुया" यानि एक अलौकिक दृश्य फरमाया है,  और इस रात के सिलसिले मे कुरान पाक मे कहीं ये नही लिखा कि अल्लाह ने नबी सल्ल को आसमानो की सैर कराई, न ही ये लिखा है कि अल्लाह.ने नबी सल्ल. को सातवें आसमान पर बुलाया, बल्कि पवित्र कुरान मे केवल इतना लिखा है कि "नबी सल्ल. ने सिदरतुल मुन्तहा (जन्नत के द्वार के निकट स्थित बेर का पेड़ ) के पास जिब्रील अ.स को देखा " 
अब क्योंकि अल्लाह अपने बन्दे को कहीं से भी कहीं का मन्ज़र रूहानी तौर पर दिखा सकता है, फिर अगर आप सल्ल. जिस्म के साथ आसमान पर गए होते, तो मक्का वालों के आगे सिर्फ येरोशलम तक के सफर को नही बल्कि आसमान के सफर को भी साबित करते ..

अब सवाल ये है कि कयामत से पहले कोई जन्नत मे नहीं जा सकता तो फिर आसमान पर तमाम नबियों से आप सल्ल. की मुलाकात कैसे हुई थी.... 
पहली बात तो ये समझिए कि आप सल्ल. से नबियों की मुलाकात जन्नत मे नहीं बल्कि आसमान पर हुई बताई गई है, और क्योंकि तब तमाम नबी बरज़ख के आलम मे थे सो यही ज़ाहिर होता है कि आप सल्ल. से तमाम नबियों की रूहों की मुलाकात हुई थी, इसलिए हज़रत आइशा रज़ि. के इसी कौल के हकीकत होने की पूरी गुन्जाइश है कि आप सल्ल. की भी सिर्फ रूह आसमान पर गई थी, जिस्म नही..

इसी तरह इस रात मे दोज़ख मे औरतों को बहुतायत से आप सल्ल. को दिखाया जाना भी एक अलौकिक दृश्य था, और औरतों के बड़ी संख्या मे दोज़ख मे होने वाली हदीस मे आगे ये लिखा है कि क्योंकि औरतें अपने पति के साथ अकारण ही नाशुक्रगुज़ारी करती हैं, इस कारण वो दोज़ख मे थीं ... इस हदीस मे ये बात केवल ये शिक्षा देने के लिए की गई है कि मरने से पहले ही स्त्रियाँ अपने दोज़ख मे जाने के एक सम्भावित कारण को जान लें और इस कारण , यानि नाशुक्री की आदत को त्यागकर अपना जन्नत मे जाना सुनिश्चित कर लें ....इस हदीस मे केवल इतना सिखाया गया है, और वास्तव मे उस समय तक कोई भी प्राणी जन्नत या दोज़ख मे नही गया था  ... 

वल्लाहु आलम !

~ ज़िया इम्तियाज़।

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भविष्य की घटना वर्तमान में दिखाना।


अक्सर हदीस साहित्य में हमें कुछ ऐसे ज़िक्र पढ़ने या सुनने को मिलते हैं जिनमे आप सल्ल० फ़रमाते हैं कि फलां शख़्स अपने किसी गुनाह की वजह से मरने के बाद दोज़ख में डाल दिया गया, या फलां शख़्स को उसके किसी नेक काम की वजह से मरने के बाद जन्नत मिली, .... एक सवाल इन किस्सों को पढ़कर सहज उठता है, और हमारे कुछ गैरमुस्लिम दोस्त भी ये सवाल यदाकदा उठाते हैं कि, इस्लामी यक़ीन तो ये है कि मरने के बाद दुनिया की शुरुआत से लेकर अब तक सारे इंसानों की रूहें "बरज़ख़" के आयाम में हैं न कि दोज़ख़ या जन्नत में, इनके दोज़ख या जन्नत में डाले जाने का फ़ैसला कयामत यानी दुनिया पर जीवन विनष्ट करने के बाद हश्र के मैदान में  अल्लाह द्वारा किया जाएगा, उसके बाद ही किसी व्यक्ति की रूह जन्नत या दोज़ख़ में जा सकती है, .... तो फिर नबी सल्ल० का लोगों को जन्नत या दोज़ख में पहले से भेजा जाना बताना, इस्लामी विश्वास से विरोधाभासी, या गलत बात नही हो गई ??? 
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जवाब: बात सही है कि अभी तक कोई व्यक्ति जन्नत या दोज़ख़ नही गया बल्कि ये सब फैसले हश्र के रोज़ होंगे... इसके बावजूद ऐसा वर्णन कई हदीसों में है कि फलां व्यक्ति दोज़ख़ गया या जन्नत भेजा गया दरअसल ये वर्णन ऐसे व्यक्तियों के बारे में है जो व्यक्ति हज़रत मुहम्मद सल्ल० के आगमन से पूर्व ही भले या बुरे कर्म कर के मृत्यु को प्राप्त हो चुके थे, और इनके कर्मों के आधार पर ईश्वर ने इनके लिए जन्नत या दोज़ख़ नियत कर दी है और इनके लिए केवल हश्र के समय तक का इंतज़ार बाक़ी है ... आने वाली नसलों को इन लोगों द्वारा किये गए कर्मों के आधार पर कोई शिक्षा देने के लिए इनकी कथाओं को ईश्वरीय अभिप्रेरण से नबी सल्ल० को बता दिया जाता था, और वास्तव में जहाँ नबी सल्ल० ये कहते हैं कि वो व्यक्ति जन्नत में या दोज़ख़ में गया तो वे भविष्य का वर्णन कर रहे होते हैं ... क्योंकि अल्लाह समय से परे के आयाम में स्थित है अतः वहाँ भविष्य की बात का वर्णन भी भूत की तरह किया जाता है, पर हम उसको इसी तरह समझेंगे कि वे लोग अभी दोज़ख़ या जन्नत, जो उनके लिये नियत कर दिया गया है उसमें जाने वाले हैं.. .!!!


~ ज़िया इम्तियाज़।
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