Monday, 10 August 2020

मंदिर ध्वस्त।

मंदिर ध्वस्त।


एक भाई ने मुझसे कहा
//...इतिहास उठा कर देख लीजिये मुस्लिम शासकों ने लाखों मदिर तुड़वा दिये और कई मंदिरों की जगह मस्जिद बनवा दी ये कोई कहानी नहीं है सच है पर आप कभी एक्सेप्ट नहीं करेंगे अब सोचने वाली बात ये हैं क्या ये सब खुदा की मर्जी पर किया गया ??? क्या खुदा ये चाहते हैं की दूसरों के धर्म स्थल को तोड़ कर अपना धर्मस्थल बनाया जाये ?? भारत तो हिन्दू राष्ट्र रहा है ऐसे उदहारण खोजने से नहीं मिलेंगे की हिन्दू राजा ने मस्जिद तोड़ कर मंदिर बनवाया हो ।...//

मैंने जो उत्तर उन्हे दिया, मुझे लगता है वो सबको जानना चाहिए, क्योंकि ये गलतफहमी मैंने अक्सर लोगों मे देखी है

मैंने उन से कहा ..... 
भाई, मैंने आइ.ए.एस. और पी.सी.एस. की परीक्षा के लिए लिखा गया, यानी सबसे ऊंचे स्तर का भारतीय इतिहास पढ़ा है, और उस मे मैंने लाख ढूंढा लेकिन कहीं भी ये लिखा नही मिला कि ... "किसी मुस्लिम शासक ने किसी हिंदू मन्दिर को तोड़कर उस पर मस्जिद बनवाई ।"... ऐसा वे कर भी नहीं सकते थे क्योंकि इस्लाम मे किसी से छीने हुए स्थान पर मस्जिद बनाना गुनाह कहा गया है 

हां कुछ मुस्लिमों द्वारा मन्दिर ध्वस्त करने का जिक्र जरूर मिलता है, लेकिन उस के पीछे भी धार्मिक द्वेष कारण नहीं था बल्कि कुछ कूटनीतिक और प्रशासनिक कारण थे .... अब उस के कारण कोई मुस्लिमों से नफरत करे तो ये उस की अज्ञानता है, क्योंकि प्रशासनिक कारणो से तो आज भी भारत मे स्वयं हिंदूओ द्वारा ही अनगिनत मन्दिर तोड़े जा रहे हैं, ... लेकिन इन प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ कोई नफरत भरा इतिहास नहीं लिखा जाने वाला...

खैर भाई आपका ये मानना है कि इतिहास मे किसी हिंदू शासक ने धार्मिक विद्वेष के कारण अन्य धर्मों के पूजाग्रहो को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया, तो ये आपकी गलतफहमी है,

उसी उच्च स्तर के इतिहास को आप पढ़िए तो आपको पता चलेगा कि सत्य क्या है

इतिहास बताता है कि 187 ईसा पूर्व मे वैदिक धर्मी पुष्य मित्र शुन्ग ने बौद्ध शासक की हत्या कर के न सिर्फ शासन पर अधिकार कर लिया बल्कि उस ने पूरे राज्य मे बौद्धो की हत्याएं करवाई, और अशोक के बनवाये 84000 बौद्ध स्तूप तुड़वा डाले.... आज भी बौद्ध पाण्डुलिपियो मे पुष्यमित्र के अत्याचारों की दास्तान लिखी हुई हैं

और सुनिए जैन धर्म के लोगों के साथ क्या किया गया ,
स्वामी दयानंद अपनी किताब "सत्यार्थ प्रकाश" मे लिखते हैं …
" दस वर्ष के भीतर सर्वत्र आर्यावर्त देश मे घूम कर जैनियो का खण्डन और वेदो का मण्डन किया ।
परंतु शंकराचार्य के समय मे जैन विध्वंस अर्थात् जितनी मूर्तियां जैनियो की निकलती हैं, वे शंकराचार्य के समय मे टूटी थीं, और जो बिना टूटी निकलती हैं , वे जैनियो ने भूमि मे गाड़ दी थीं कि तोड़ी न जाएं ॥ वे अब तक कहीं कहीं भूमि मे से निकलती हैं ।
[ सत्यार्थ प्रकाश, समुल्लास 11, शंकराचार्य का अध्याय ]

तो भाई जरा एक नजर इस ओर के इतिहास पर भी डालिए, और वो भी सुनिए जो अनेक जैन और बौद्ध लोग कहा करते हैं कि हिंदू राजाओ ने अपने शासन काल मे कई जैन, बौद्ध मन्दिरो पर कब्जा कर के उन्हें हिंदू मन्दिरो मे परिवर्तित कर दिया है
तो भाई देख लो , जो आरोप आप हमारे पूर्वजों पर लगा रहे हो, कहीं वो आपके ही पूर्वजों पर न साबित हो जाए

~ ज़िया इम्तियाज़।

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